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Bleed…

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उन् में…

उन् में खुद को खो देना चाहती हूँ |
उन् बिन खुद को फिर से खोने की चाहत में पाती हूँ ||

एक बार फिर डूबना चाहती हूँ |
उन् आँखों में डूबके जीना चाहती हूँ ||

दर्द-ए-आशिकी सहना चाहती हूँ |
रूह में उनके मेहफ़ूज़ रहना चाहती हूँ ||

इश्क़ में उनके रोशन लुट्ना चाहती हूँ |
या इसी कोशिश में अपना दिल लुटाना चाहती हूँ ||

क़ायनात भर की बातें करना चाहती हूँ |
आँखों से हो बातें सो चुप रहना चाहती हूँ ||

मिलान को उनसे तड़पना चाहती हूँ |
तड़प पनपे उतनी दूर न रहना चाहती हूँ ||

न जाने ग़ैर मुनतमिन मैं क्या चाहती हूँ |
बस इतना इल्म है हर दुआ-ए-क़ुनूत में बस उन्हें चाहती हूँ ||

Moon kissed smile…

I would walk the terrains,

I would walk a mile..

Just to catch a glimpse,

Of your moon kissed smile…

 

Like a reflection so beautiful,

On  a river so still..

Like a patch of green,

On a snow top hill…

 

It’s a sight worthy of a portrait,

Like a picture worth a frame..

A smile so beautiful,

Beyond words, beyond fame…

 

Accompanying that madness,

That little wrinkle of the nose..

Prettier than the prettiest,

More innocent than a bud of rose…

 

Haven’t watched it make the sun set,

Yes, it’s been a while..

Oh what I wouldn’t give for a glance,

Of that familiar moon kissed smile…

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जूनून-ए-इश्क़

अब भी कांपते हाथों से दिल के दरारों को सी लेती हूँ ।
अब भी दबे लबों से अश्क़ों के घूँट मैं पी लेती हूँ ॥

इस बेनुमाइंदगी का कोई तो मुक़ाम होगा ।
इस बेदिली का कभी तो कोई इन्तेक़ाम होगा ॥

बेबसी के इस आलम में दिल का ज़ोर बेशुमार है ।
इंतज़ार है न खत्म होने वाली और करना मुझे इख्तियार है ॥

सिलसिला हमारी कहानियों का हर जुबां पे आम होगा ।
बेआबरू मेरा जूनून-ए-इश्क़ अब सर-ए-आम होगा ॥